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पर्यावरणिक प्रबंधन सेवाएँ:



ENV-1

 

सीएमपीडीआई भारत तथा विदेशों में सुसाध्य खनन डिजाइन तथा न्यूनीकरण (मिटिगेशन) प्रैक्टिस को पर्यावरणिक रूप से प्रौन्नत करने के लिए कोयला एवं खनिज सेक्टर के बहु-आयामी पर्यावरणिक जटिलताओं से संबंधित निरंतर कार्य कर रहा है।

 

इस सेवा में खनन तथा कोयला परिष्करण परियोजनाएँ, प्रदूषण नियंत्रण सुविधाओं (इन्डस्ट्रियल एंड डोमेस्टिक इफ्लूएंट प्लांट्स) की प्लानिंग एवं डिजाइन माइन क्लोजर प्लान, डम्प तथा हाई वाल तथा नियमित पर्यावरणिक मॉनिटरिंग (जल, वायु, ध्वनि) के लिए स्लोप स्टेबिलिटी विश्लेषण हेतु ईआईए/ईएमपी शामिल है। सीएमपीडीआई ईआईए/ईएमपी के अध्ययननार्थ अपेक्षित बेस लाइन डाटा तैयार करता है। सीएमपीडीआई, मुख्यालय के पर्यावरणिक प्रयोगशाला को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा मान्यता दे दी गई है तथा आईएसओ 9001 का इसे प्रमाण-पत्र भी प्राप्त हो चुका है।


 
सीएमपीडीआई को, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, भारत सरकार की आवश्यकता के अनुसार दो सेक्टरों यथा ओपेनकास्ट/अंडरग्राउंड माइनिंग तथा कोल वाशरियों सहित खान तथा खनिज के लिए ईआईए परामर्शी संगठन के रूप में नेशनल बोर्ड ऑफ एजुकेशन एंड ट्रेनिंग (एनएबीईटी) क्वालिटी काउन्सिल ऑफ इंडिया (क्यू सी अई) नई दिल्ली द्वारा मान्यता मिल गई है।

 

1. पर्यावरणिक प्रभाव का मूल्यांकन (ईआईए)।पर्यावरणिक प्रबंधन योजना (ईएपी) पर्यावरण एवं वन मंत्रालय से पर्यावरणिक क्लीयरेंस प्राप्त करने के लिए कोयला परियोजनाओं तथा कोयला परिष्करण प्लांट के लिए अध्ययन


ईआईए/ईएमपी में लिए गए तथा कवर किए गए अध्ययन इस प्रकार हैं:
क. बेसलाइन डाटा का सृजन:कोर एवं बफर जोन में मौसमी डाटा, परिवेशी वायु एवं जल की गुणवत्ता ध्वनि स्तर, मिट्टी की क्वालिटी, भूमि उपयोग का अध्ययन, वनस्पति एवं जीव-जन्तु तथा जनसंख्या की सामाजिक स्थिति का रिकाडिंग कवर करना


ख. प्रभाव का मूल्यांकन तथा प्रबंधन योजना (इमोक्ट असिसमेंट तथा मैनेजमेंट प्लान:
भूमि पर खनन के कारण वायु, जल, और ध्वनि स्तर, जल-भूवैज्ञानिकी रेजिम, वनस्पति एवं जीव-जन्तु तथा समाज पर पड़े प्रभाव का मूल्यांकन शामिल करता है। पर्यावरणिक प्रभाव को घटाने के लिए उपयुक्त उपायों की प्लानिंग, तथा वायु, जल, एवं ध्वनि की कमी उपायों के माध्यम से स्थानीय पर्यावरण में सुधार, भूमि पुनरूद्धार, ग्रीन बेल्ट का विकास, पुनर्वास तथा रिस्टोरेशन (आरएंडआर) धँसान प्रबंधन, वास्ट मैनेजमेंट तथा परिस्थितिकी विकसित किया जाता है। कोयला एवं खनिज परिष्करण प्लांटों सहित ओपेन कास्ट एवं अंडरग्राउंड कोयला/खनिज माइन्स को कवर करते हुए 400 से अधिक ईआईए/ईएमपी का अध्ययन पूरा किया जा चुका है, जिसमें से पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा 350 से अधिक को पर्यावरणिक क्लीयरेंस दिया जा चुका है। इसमें 35 एमटी वाई की कोयला परियोजनाओं, पाइराइट माइन्स रेयर अर्थ, जिप्सम तथा बाक्साइट खान का ईआईए/ईएमपी शामिल है।


ग.क्षेत्रीय पर्यावरणिक अध्ययन:
ईब वैली, कोयलाफील्ड्स, वर्धा वैली कोयला फील्ड्स तथा ईस्ट बोकारो कोयला फील्ड्स के लिए खानों तथा अन्य उद्योगों को कवर करते हुए कोयला क्षेत्रों के लिए क्षेत्रीय ईआईए स्टडी तैयार कर किया गया है।

 

2. पर्यावरणिक मॉनिटरिंग:
पर्यावरण एवं वन मंत्रालय भारत सरकार तथा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के संविधिक निदेशों का अनुपालन करने के लिए सैम्पलिंग तथा विश्लेषण में अनुभवी तथा प्रशिक्षित कार्मिकों के माध्यम से माइनिंग परियोजनाओं तथा कोयला परिष्करण प्लांटों का पर्यावरणिक मॉनिटरिंग किया जाता है। सीएमपीडीआई मुख्यालय के पर्यावरणिक प्रयोगशाला को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा मान्यता (रिकोगनाइज्ड) प्रदान कर दी गई है।


3. पर्यावरणिक विवरण तथा माइन क्लोजर प्लान:
कोयला मंत्रालय, भारत सरकार, द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों के टर्म में खानों का सुरक्षित एवं कायम रखने योग्य क्लोजर के लिए विभिनन कोयला खनन परियोजनाओं तथा माइन क्लोजर प्लान (एमसीपी) का वार्षिक पर्यावरणिक विवरण नियमितता के आधार पर किया जाता है।

 

4.स्लोप स्टेबिलिटी तथा मिट्टी संरक्षण अध्ययन:
ओबी डम्प (बाह्य एवं आंतरिक क्षेत्रों) का स्लोप स्टेबिलिटी का विश्लेषण सीएमपीडीआई, मुख्यालय में स्थापित स्लोप स्टेबिलिटी सेल के माध्यम से पेश की गई सेवा का यह अन्य क्षेत्र है। वन क्लीयरेंस की शर्त के अनुपालन के लिए मिट्टी संरक्षण तथा प्रबंधन योजना भी बनाई जाती है।
अतीत में पूरी की गई परियोजनाओं में सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) की भुरकुण्डा ओपेनकास्ट परियोजना, जयंत ओसीपी (एनसीएल) के लिए स्लोप स्टेबिलिटी अध्ययन, तथा करमा तोपा, उरीमारी एवं सीसीएल की नार्थ ओपेनकास्ट परियोजनाओं के मिट्टी कटाव का अध्ययन इसके अंतर्गत आते हैं।

 

5. अभियंत्रिकी सेवाएँ (इंजीनियरिंग सर्विसेज):
औद्योगिक एवं घरेलू इफ्ल्यूसेंट ट्रीटमेंट प्लांट की प्लानिंग एवं डिजाइन के लिए सेवाएँ, जलापूर्ति वितरण नेटवर्क तथा जल ट्रीटमेंट सुविधाएँ बाहरी ग्राहकों के लिए उपलब्ध कराई जाती है। कुछ नियोजित एवं डिजाइन्ड ट्रीटमेंट प्लांट,: लिदो एसिड माइन ड्रेंज, एनईसी निगाही, एनसीएल की जयंत एवं कृष्णशीला परियोजनाएँ, सीसीएल का कथारा वाशरी तथा रीजनल टेलीकाम ट्रेरिंग सेंटर का घरेलू गंदा जल, बीएसएनएल तथा अन्य सबों में राँची है। जल भू-वैज्ञानिक सेल के अनुभवी टीम के सहयोग से खानों (माइन्स) के लिए ग्राउण्ड वाटर का अध्ययन किया जाता है।

 

6.भूमि उपयोग की योजना:
जियोमेटिक विभाग के रिपोर्ट सेंसिंग सेल के सहयोग से पर्यावरण विभाग परियोजना तथा नगरी एवं क्षेत्रीय प्लानिंग हेतु सेटेलाइट इमेजरी तकनीक के द्वारा भूमि के उपयोग का अध्ययन करता हे।

 

7. रेन वाटर हारवेस्टिंग:
अमूल्य सतही जली स्त्रोत के संरक्षण/संवृद्धि के लिए रूफ टाॅप रेनवाटर हारवेस्टिंग योजना भी बनाई गई है।

 

निम्नलिखित विशिष्ट क्षेत्रों में परामर्शी सेवाएँ उपलबध कराई जाती है।
क. जैविक पुनरूद्धार अध्ययन
ख. ओबी डम्प पुनरूद्धार अध्ययन
ग. धूल का सर्वेक्षण (इस्ट सर्वे)
घ. पर्यावरणिक गर्म स्थ्लों की पहचान सहित जोनिंग(क्षेत्रीय) एटलस
ड. क्षमता निर्माण (केपेसिटी बिल्डिंग)
च. परिस्थितिकी संवेदनशील क्षेत्रों के लिए पर्यावरणिक प्लानिंग
छ. इसके गुण तथा ईआईए/ईएमपी सहित माइनिंग सेक्टर में उड़ने वाली धूल (फ्लाई डस्ट) का निपटान
ज. खान पर्यावरणिक प्रबंधन के इमरजिंग एरिया में अनुसंधान एवं विकास

 

अतीत में शामिल किए गए कुछ विशेष अध्ययन:
1. मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हेतु सतना लाइम स्टोन बेल्ट एवं कोरबा क्षेत्र (एरिया) के लिए जोनिंग इन्वायरमेंटल प्लानिंग


2. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, दिल्ली के लिए गुड़गाँव में आरावली पहाड़ी (हिल्स) अलवर, छत्तीसगढ़ तथा उदयपुर डिस्ट्रिक्ट के इके-रिस्टोरेशन हेतु एक्शन प्लान यथाः इको-सेन्सिटिव रिजनस के लिए जोनिंग इन्वायरमेंटल प्लानिंग


3. कैरेइंग केपेसिटी अध्ययन में राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के लिए पर्यावरणिक मास्टर प्लान शामिल है।


4. क्षमता निर्माण (केपेसिटी बिल्डिंग):
क. पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, भारत सरकार के लिए वित्त प्रदत्त विश्व बैंक के तहत पर्यावरणिक प्रबंधन क्षमता निर्माण तकनीकी सहायता परियोजना (खनन उप घटक) भारत के क्रिया-कलाप के अंतर्गत मानिटरिंग अनुपालन के लिए खनन तथा पर्यावरणिक नीतियों, विधि निर्माण, मानकों तथा मैकनिज्म का पुनरीक्षण


ख. पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, भारत सरकार के लिए वित्त प्रदत्त विश्व बैंक के तहत पर्यावरणिक प्रबंधन क्षमता निर्माण तककीकी सहायता परियोजना (खनन उप-घटक) भारत के क्रिया-कलाप के अंतर्गत खनन पर्यावरण के क्षेत्र में केंद्र/राज्य स्तर तथा प्रतिरूप (काउन्टर पार्ट) संस्थानों पर रेगुलेटरी एजेसिंयों की मजबूती।


5. पुनर्वास एवं माइन क्लोजर प्लान:
क. एमसीएल के गौरवी खान (माइन) का माइन क्लोजर प्लान
ख. फरीदाबाद डिस्ट्रिक्ट के आरावली पहाड़ी क्षेत्रों में स्माल सिलिका सेंड माइन की पुनर्वास योजना


6. फ्लाई ऐश का निपटान अध्ययन:
क. एनटीपीसी के मेसर्स तालचर थर्मल पावर स्टेशन तथा मेसर्स नेशनल अलम्यूनियम कंपनी (नालको) के थर्मल पावर स्टेशन का प्लाई ऐश के निपटान का अध्ययन
ख. एनटीपीसी के लिए गौरवी खान की रिक्ति अर्थात् खाली जगहों में बैक फिलिंग के लिए जल-भूवैज्ञानिकी जांच-पड़ताल एवं ईआईए

अनुसंधान एवं विकास:


विभाग ने कोयला मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वित्त प्रदत्त निम्नलिखित अनुसंधान परियोजनाओं का कार्य अपने हाथ में लिया है तथा इसे हाल में ही पूरा कर दिया है।

  • कोयला ओपेनकास्ट परियोजना (पूर्ण) में माइनिंग मशीनरी तथा आॅपरेशन के लिए उत्सर्जन फैक्टर
  • खान रिक्ति के पुररूद्धार (प्रगति पर) के लिए फ्लाई ऐश (उड़ती हुई धूल) का गुण-निर्धारण

पर्यावरणिक प्रयोगशाला सुविधाएँ:

 

विभिन्न प्रकार के पर्यावरणिक गुणों का पर्यावरणिक मॉनिटरिंग करने के लिए सीएमपीडीआई के पास पूर्ण रूप से सुसज्जित ‘‘स्टेट-आफ-आर्ट’’ पर्यावरणिक प्रयोगशाला है। इस प्रयोगशाला को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा अंगीभूत कर लिया गया है तथा इसे आईएसओ 9001 का प्रमाण-पत्र प्राप्त है।

यह प्रयोगशाला निम्नलिखित सुविधाओं से युक्त है:

  • वायु की गुणवत्ता का विश्लेषण (एयर क्वालिटी का विश्लेषण):
    • ससपेंडेड पार्टीकुलेट मैटर (एसपीएम)
    • रिसपरेबुल पार्टीकुलेट मैटर (आरपीएम)
    • आक्साइड आफ सल्फर (एसओएक्स)
    • आक्साइड ऑफ नाइट्रोजन (एमओएक्स)
    • कार्बन मोनोक्साइड (सीओ)
    • कुल हाइड्रोकार्बन्स
    • कुल जमने योग्य धूल (टोटल सेटसेबस डस्ट)
  • जल/बहिःस्राव क्वालिटी का विश्लेषण:
    • फिजीकल पारामीटर्स (पीएच, कलर, तापमान, टर्बोडिसी, इत्यादि))
    • रासायनिक विशेषताएँ (सीओडी, हैवी मेटलस तथा ट्रेस मेटलस)
    • जैविक विशेषताएँ (बीओडी, एमपीएन)
  • ध्वनि का स्तर:
    • ध्वनि तीव्रता (इन्टेनसिटी) का सर्वेक्षण
    • ध्वनि का लेक मूल्यांकनe

 

पीपीएम/पीबीएम स्तर पर ट्रेस एलीमेंट विश्लेषण को सरल बनाने के लिए स्वचालन अवशोषण स्पेक्ट्रोमीटर तथा इन्डक्टिविटी कपल्ड प्लाजमा (आईसीपी) मीटर हाल ही में चालू किया गया है।