सीएमपीडीआई वेबसाइट पर आपका स्वागत है


           सीआईएल मेल           
हमे फेसबूक पर पसंद करे टिवीटर पर फॉलो करना
ऑनलाइन भर्ती
ऑनलाइन भर्ती


अस्वीकृति

मील के पत्थर



    वर्ष 1975 से 1980


  • सीएमपीडीआई चार क्षेत्रीय संस्थानों-आसनसोल में (क्षेत्रीय संस्थान-1), धनबाद में (क्षेत्रीय संस्थान-2), रांची में (क्षेत्रीय संस्थान-3), तथा नागपुर में (क्षेत्रीय संस्थान-4) के साथ सीआईएल की एक अनुषंगी के रूप में समाविष्ट हुआ।
  • काला हीरा परियोजना की तैयारी- कोयले की दस वर्षीय महत्वपूर्ण योजना।
  • गवेषण एवं संदोहन के लिए संपूर्ण स्त्रोतीय आधार की पहचान एवं सर्जन जिससे सीआईएल में उत्पादन में अत्याधिक वृद्धि हो सके।
  • सीएमपीडीआई कोयला सेक्टर में आरएंडडी गविविधियों के समन्वयन तथा प्रबोधन हेतु नोडल एजेंसी बन गया।

    वर्ष 1981 से 1985


  • बिलासपुर में (क्षेत्रीय संस्थान-5) तथा सिंगरौली में (क्षेत्रीय संस्थान-6) की स्थापना।
  • सीएमपीडीआई द्वारा एमजीआर के साथ द्रुत लोडिंग प्रणाली (6000 टन प्र.घ.मी.) की योजना बनाई गई तथा इसे एनसीएल के जयन्त ओसीपी में प्रारंभ किया गयां
  • दस(10) घन मीटर वाले रोप शॉवेल तथा 85 टन वाले रियर डम्पर के साथ खुली मुख खदानों के लिए योजनाएं बनाई गई तथा उन्हें आरंभ किया गया।
  • आधुनिक गवेषण तकनीक का विकास एवं स्वदेशीकरण।
  • भूमिगत खदानों में एसडीएल/एलएचडी के व्यवहार के साथ माध्यमिक तकनीक की पहचान कराई गई।

    वर्ष 1986 से 1990


  • भुवनेश्वर में (क्षेत्रीय संस्थान-7) की स्थापना।
  • विशिष्ट धुआंरहित जलावन (एसएसएफ) का पेटेंट (एकस्व प्राप्त) करवाना।
  • कोयला उद्योग में सेटेलाइट रिमोट सेंसिंग का अध्ययन करना।
  • प्रमुख कोयला क्षेत्रों में अग्रिम (एडवांस)ईएमपीएस का योजना बनाना।
  • अध्वंसात्मक टेस्टिंग की व्यवस्था को स्थापित किया गया।
  • बीस (20) घन मीटर वाले रोप शॉवेल तथा एक सौ सत्तर (170) टन वाले रियर डम्पर के साथ खुली मुख खदानों (ओपेनकास्ट) की योजना तैयार की गई तथा उन्हें प्रारंभ किया गया।
  • एनसीएल के बीना में प्रथम बार गैर-कोकिंग कोयला की धुलाई संयंत्र की योजना बनाई गई तथा उन्हें चालू किया गया।
  • प्रमुख खदानों की परिचालन योजना प्रारंभ की गई।

    वर्ष 1991 से 1995


  • राँची में अर्थ साइंस म्यूजियम (पृथ्वी विज्ञान संग्रहालय) खोला गया।
  • एमसीएल, भरतपुर, सीएचपी(3.5 मि.ट.प्र.वर्ष) का टर्न की निर्माण।
  • पर्यावरण प्रयोगशाला का नेटवर्क स्थापित किया गया।
  • तंजानिया में सर्वप्रथम प्रमुख विदेशी परामर्शी कार्य की प्राप्ति।

    वर्ष 1996 से 2000


  • सीएमपीडीआई(मुख्यालय), रांची में लैन की स्थापना।
  • भूभौतिकीय लॉगिंग के साथ गैर-कोरिंग ड्रिलिंग का पुरस्थापन।
  • इनसीम सिस्मिक सर्वे का पुरस्थापन।
  • मैनेक्स सॉफ्टवेर के माध्यम से खनन योजना का पुरस्थापन।
  • सीएमपीडीआई द्वारा की गई सेवाओं के लिए आईएसओ 9001 प्रमाणन की प्राप्ति।
  • प्रबंधन प्रणाली परामर्शदाता के रूप में विविधीकरण।

    वर्ष 2000 से 2006


  • कोयला मंत्रालय की ओर से विजन कोल 2025 प्रारूप दस्तावेज बनाए गए।
  • आईएसओ प्रमाणन की श्रेणी में आईएसओ 9001-2000 के रूप में बढो़तरी की गई।
  • यूएनइंटरनेशनल फ्रेमवर्क क्लासीफिकेशन दिशा-निर्देश के अनुसार कोयला स्त्रोत डाटाबेस सर्जन हेतु कोयला तथा लिग्नाईट के तहत इन्टीग्रेटेड कोल रिर्सोंसेस इनफारमेंशन सिस्टम (आईसीआरआईएस) नामक परियोजना कार्य को लिया गया।
  • कोल इंडिया लिमिटेड के आरएंडडी प्रोग्राम के अंतर्गत ईनफामेशन।
  • सेंटर ऑफ़ कोल एंड लिग्नाइट परियोजना आरंभ किया गया।
  • डायरेक्टरेट जेनरल ऑफ़ हाइड्रोकार्बन्स के लिए सात (7) प्रत्याशित सीबीएम ब्लोकों का निरूपण तथा उनका डाटा पैकेज तैयार करना।
  • सीआईएल तथा ओएनजीसी संघ द्वारा झरिया एवं रानीगंज कोयला क्षेत्रों में सीबीएम की संभावना के सहयोगात्मक विकास के लिए सीआईएल की ओर से कार्यान्वयन करने वाली एजेंसी।

    वर्ष 2007 से अब तक


  • मई 2009 में एक मिनी रत्न कंपनी (श्रेणी-।।) की उपाधि से विभूषित हुआ।
  • वर्ष 2009-10 के लिए संश्लिष्ट एमओयू के स्कोर 7.0(अधिकतम) के साथ उच्चतम एमओयू रेटिंग प्राप्त की।
  • एमओयू रेटिंग के अनुसार वर्ष 2008-09 के लिए सीआईएल की अनुषंगी कंपनियों में सबसे अच्छा निष्पादन करने वाली कंपनी साबित हुई।
  • कोयला मंत्रालय तथा यूएसईपीए के तत्वावधान में कोयला मंत्रालय के दृष्टांत पर नवम्बर, 2008 में ‘इंडिया सीएमएम/सीबीएम क्लियरिंग हाउस’ की स्थापना सीएमपीडीआई, रांची, झारखंड में हुई।
  • वर्ष 2009-10 के लिए आरएंडडी तकनीकी विकास तथा नवप्रवर्तन के लिए स्कोप मेरिटोरियस एवार्ड संस्तुति प्रमाण-पत्र द्वारा पुरस्कृत हुआ।
  • जुलाई, 2009 में टोपोग्राफीकल मैपिंग (स्थलाकृति विज्ञान मानचित्रन) के लिए भारत के एमओयू के साथ सर्वे किया गया।
  • रेसिन एवं सीमेंट कैप्सुलों के लिए प्रयोगशाला में परीक्षण की सुविधाएँ (डीजीएमएस द्वारा स्वीकृत) स्थापित की गई।
  • सीबीएम संबंधी अध्ययनों के संचालन हेतु 2008 में स्टेट आफ आर्ट सीबीएम प्रयोगशाला स्थापित की गई।
  • विल्ट-आपरेट-मेनटेन (निर्माण-प्रचालन- रख-रखाव) के आधार पर वाशरी के निर्माण हेतु मॉडेल बिड दस्तावेज तैयार किये गए।
  • भू-तल खदानों में व्यापक उत्पादन तकनीक हेतु मानकीकृत ग्लोबल बिड तैयार किया गया।
  • 2008-09 के दौरान सीएमपीडीआई में ई-पुस्तकालय स्थापित किया गया।
  • एसईसीएल के कुसमुण्डा, जो कि भारत में अभी तक प्लान किया गया सबसे वृहत खदान है, के लिए पचास (50) मिलियन टन प्रतिवर्ष क्षमता के खुली खदान (ओपेनकास्ट) की प्लानिंग।
  • मेटल माइनिंग सेक्टर में मैगेनीज ओर (भारत) लिमिटेड, हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड, हट्टी गोल्ड माइन्स कंपनी लिमिटेड आदि के लिए प्रमुख परामर्शी कार्य किये गए।
  • बीसीसीएल के मुनीडीह खदान में यूएनडीपी/जीईएफ/जीओआई द्वारा निधिबद्ध सीबीएम/सीएमएम वसूली उपयोगी प्रर्दशन/निदर्शन परियोजना का सफलतापूर्वक कार्यान्वयन।
  • सीआईएल के विस्तृत खुली खदानों (ओपेनकास्ट) में रिमोट सेसिंग द्वारा भूमि के उपयोग का प्रबोधन प्रारंभ किया गया।
  • एमपीआरएल प्रणाली के माध्यम से मुख्यालय, रांची के साथ सभी क्षेत्रीय संस्थानों का सहयोजन स्थापित।
  • वर्ष 2009-10 के अवधि के दौरान बाहरी स्त्रोतों (आउटसोर्सिंग) के जरिये पहली बार एक वर्ष में चार (4) लाख मीटर ड्रिलिंग के लक्ष्य को पार किया।
  • तीव्रतर गति की ड्रिलिंग के लिए उच्च क्षमता वाले हाइड्रोस्टैंटिक ड्रिलों को पुनःस्तापित किया गया।
  • मार्च 2012 माह के दौरान एक हाइड्रोस्टैटिक ड्रिल (सीटी-1) द्वारा 1464 मीटर की चरम उत्पादकता प्राप्त की गई जो कि कोरिंग ड्रिलिंग के क्षेत्र में सर्वाधिक उत्पादकता है।
  • कोयला कंपनियों द्वारा अपनायें जाने हेतु खदान बन्दी की तैयारी से संबंधित दिशा-निर्देश बनाये गए।
  • यूनाइटेड नेशन्स फ्रेमवर्क क्लासिफिकेशन्स (यूएनएफसी) के अनुसार सीआईएल के कोयला के स्रोतों एवं रिजर्व का वर्गीकरण किया गया।
  • "इंटीग्रेटेड कोल रिसोर्स इनफॉर्मेशन सिस्टम" (आईसीआरआईएस) नाम की परियोजना के एक हिस्से के रूप में देश के कोयला स्रोंतों के आँकड़ों को भारत के सभी कोयला क्षेत्रों में एक डाटा बेस के सृजन के लिए डिजिटल फार्म में अधिकार में ले लिया गया।
  • दामोदर घाटी तथा सोहागपुर बेसिनों में शेल गैस स्त्रोतों के लिए अन्तर्देशीय प्रतिस्पर्धी बिडिंग तथा पुरोलक्षी क्षेत्रों के निरूपण द्वारा डायरेक्टरेट जेनरल ऑफ़ हाइड्रोकार्बन्स (डीजीएच) द्वारा प्रत्याशित सीबीएम ब्लॉकों के निरूपण के लिए सीबीएम राउण्ड-वी जांच के तहत व्यावसायिक विकास हेतु अवार्ड के लिए निर्धारण रिपोर्ट बनाए गए।
  • कोयला खदानों में भूमि उद्धार प्रबोधन हेतु जियोस्पैशियल तकनीक के उत्कृष्ट उपयोग की पहचान के रूप में वर्ष 2012 में जियोस्पैशियल वल्र्ड एक्सलेंस एवार्ड प्राप्त किया।