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यूएनएफसी क्लासीफिकेशन (वर्गीकरण)




यूनाईटेड नेशन फ्रेमवर्क क्लासीफिकेशन (यूएनएफसी) ऊर्जा एवं खनिज रिजर्व/स्रोतों के वर्गीकरण/आकलन एक सर्वत्र व्यवहृत योजना है। यह सर्वप्रथम यूरोप के लिए यूनाईटेड नेशन इकोनामी कमीशन (यूएनईसीई) द्वारा वर्ष 2004 में अपनाया गया था।


यूएनएफसी में तीन धूरियों सहित एक त्रिआयामी प्रणाली शामिल है:


जी एक्सीस (जी धूरी)-: भूवैज्ञानिकी निर्धारण करीब-करीब भारत में जीएसआई तथा अन्य एजेंसियों द्वारा अपनाये गए आईएसपी के वर्गीकरण जैसा ही है। भूवैज्ञानिकी निर्धारण की प्रक्रिया सामान्य रूप से विभिन्न चरणों में बढ़ते हुए व्योरे के अनुसार किया जाता है। भूवैज्ञानिक अन्वेषण की प्रारूपिक आनुक्रमिक चरण है- सर्वेक्षण, पूर्वेक्षण, सामान्य गवेषण तथा व्यापक गवेषण। स्पष्ट तौर पर परिभाषित कोटि के भूवैज्ञानिकी भरोसे के साथ स्रोत आँकड़ों का सृजन करना। अतः इन चारो चरणों को वर्गीकरण के क्षेत्र में भूवैज्ञानिकी निर्धारण के वर्गों के रूप में उपयोग किया जाता है।


एफ एक्सीस(एफ धूरी): किसी भी खनन परियोजना के निर्धारण की प्रक्रिया में संभाव्यता मूल्यांकन अध्ययन एक आवश्यक अंग होता है। संभाव्यता निर्धारण के प्रारूपिक आनुक्रमिक चरण यथा-प्रारंभिक चरण में भूवैज्ञानिकी अध्ययन तदुपरांत पूर्व संभाव्यता अध्ययन तथा संभाव्यता अध्ययन/(खनन रिपोर्ट अर्थात् संभाव्यता अध्ययन की प्रारंभिक निर्धारण को अच्छी तरह से स्पष्ट किये गए हैं।


ई एक्सीस (ई धूरी) : आर्थिक क्षमता के विभिन्न कोटियों (किफायती या संभावित रूप से किफायती या आंतरिक रूप से किफायती) का निर्धारण पूर्व संभाव्यता एवं संभाव्यता अध्ययन के दौरान किया जाता है। पूर्व संभाव्यता अध्ययन, संभाव्यता अध्ययन की तुलना में निम्नतर स्तर की यथार्थता के साथ प्रारंभिक निर्धारण उपलब्ध कराता है, जबकि सभांव्यता अध्ययन द्वारा आर्थिक क्षमता का अध्ययन विस्तारपूर्वक किया जाता है।


अतः यूएनएफसी एक तीन अंकीय कोड प्रणाली है, जिसका पहला अंक आर्थिक क्षमता की धूरी का प्रतिनिधित्व करता है, दूसरा अंक संभाव्यता धूरी का प्रतिनिधित्व करता है तथा तीसरा अंक भूवैज्ञानिकी धूरी का प्रतिनिधित्व करता है। इनमें से प्रत्येक धूरी के अंतर्गत घटते क्रम में 1,2 तथा 3 कोड है। इसी तरह संभाव्यता निर्धारण के अंतर्गत 1,2 एवं 3 कोड है। भूवैज्ञानिकी निर्धारण के अंतर्गत 4 कोड यथा व्यापक गवेषण (2) क्षेत्रीय गवेषण (3) पूर्वेक्षण एवं (4) सर्वेक्षण (टोह लगाना) है। इस प्रकार यूएनएफसी प्रणाली में उच्चतम कोटि के स्त्रोत के पास कोर्ड (111) होंगे तथा निम्नतम कोटि के स्त्रोत के पास कोड (334) होगा।



तदनुसार सीआईएल के तहत कोयला संसाधनों / भंडार को संहिताबद्ध नीचे दी गई तालिका में किया गया है:


क. कोयला भंडार


कोड कोड विवरण

1,1,1

संसाधन जी-1 कोटि का है, संभाव्यता अध्ययन (एफ-1) किया जा चुका है तथा आर्थिक रूप से व्यवहार्य है (ई-1)। आज की तिथि के अनुसार शेष खनन योग्य भंडार (लूजिंग खान के भंडार को छोड़कर) इस कोटि में होगा।

1,2,1

यह संसाधन जी-1 कोटि का है तथा सिर्फ पूर्व संभाव्यता अध्ययन किया गया है। लेकिन इससे यह पता चलता है कि दोहन आर्थिकोन्मुखी (किफायती) होगा।

1,2,2

यह संसाधन अनुमानित (इंडिकेटेड) जी-2 कोटि का है तथा सिर्फ पूर्व संभाव्यता अध्ययन (एफ-2) किया गया है, जिससे यह पता चलता है कि दोहन किफायती (ई-1) होगा।


ख. शेष भंडार


कोड कोड विवरण

2,1,1

संसाधन जी-1 कोटि का है, संभाव्यता अध्ययन (एफ-1) किया जा चुका है तथा किफायती (ई- 2) होने की संभावना है।

2,2,1

संसाधन जी-1 कोटि का है। पूर्व संभाव्यता अध्ययन किया जा चुका है तथा किफायत होने की संभावना है। हमारे मामले में खनन के दौरान नुकसान में इस कोटि को शामिल किया गया है तथा गणना पीआर में विचार किए गए भू-वैज्ञानिक भंडार से आकलित खनन योग्य भंडार को घटा कर की जा सकती है।

2,2,2

यह संसाधन जी-2 कोटि का है, पूर्व संभाव्यता अध्ययन (एफ-2) किया जा चुका है तथा संभावित किफायती (ई-2) किया जा चुका है तथा संभावित किफायती (ई-2) पाया गया है।

3,3,1

यह संसाधन जी-1 कोटि का है, कोई अध्ययन नहीं किया गया है लेकिन जीआर उपलब्ध है इसलिए आर्थिक मानदण्ड निर्धारित (ई-3) नहीं किया गया है।

3,3,2

यह संसाधन जी-2 कोटि का है, कोई अध्ययन नहीं किया गया है इसलिए आर्थिक मानदण्ड निर्धारित नहीं किया गया है।

3,3,3

यह संसाधन जी-3 कोटि का है, कोई अध्ययन नहीं किया गया है, इसलिए आर्थिक मानदंड निर्धारित नहीं किया गया है।

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